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उत्तराखंड के DGP ने क्यों याद दिलाई वर्दी की ताकत, दिखाई नाराजगी

06:21 PM Dec 16, 2022 IST | Khabar Devbhoomi Desk
उत्तराखंड के dgp ने क्यों याद दिलाई वर्दी की ताकत  दिखाई नाराजगी
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उत्तराखंड के DGP dgp ashok kumar im meetingउत्तराखंड के DGP अशोक कुमार ने अपनी ही फोर्स के अधिकारियों से खुश नहीं हैं। डीजीपी साहब ने अपने अधिकारियों को अपनी प्रोफेशनल योग्यता को बढ़ाने के लिए कहा है। साथ ही पुलिस अधिकारियों को वर्दी की ताकत का एहसास भी कराया है।

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शुक्रवार को डीजीपी अशोक कुमार ने परिक्षेत्र और जनपद प्रभारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करने एवं अपराध नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान की पाक्षिक समीक्षा की। इस दौरान डीजीपी कई मसलों पर अपने मातहत अधिकारियों से नाराज हुए तो वहीं सलाह भी दे डाली।

उत्तराखंड के DGP की चेतावनी

डीजीपी ने गैंगस्टर एक्ट के अन्तर्गत दर्ज सभी अभियोगों के अभियुक्तों की अवैध रूप से अर्जित की गयी सम्पत्ति को कुर्क करने में कम कार्यवाही होने पर नाराजगी जताई है। डीजीपी ने कहा है कि ऐसी सम्पत्तियों का शीघ्र चिन्हीकरण कर कार्यवाही बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

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तीन तीन हथियार फिर भी खाली हाथ

वहीं DGP अशोक कुमार ने अपने मातहतों की जमकर क्लास लगाई है। डीजीपी ने कहा है कि पुलिस के पास कर्तव्य पालन हेतु तीन-तीन अधिकार हैं। सबसे पहले हमें राज्य सरकार द्वारा वर्दी दी गई है। दूसरे हमें अपराधियों से लड़ने के लिए शस्त्र दिए गए हैं और तीसरे हमारे पास कानून का अधिकार है। जिसके अन्तर्गत हम एफआईआर दर्ज कर सकते हैं, अपराधियों को गिरफ्तार कर सकते हैं। हमारी यह नैतिक जिम्मेदारी है कि हम इन तीनों अधिकारों का सदुपयोग पीड़ितों, गरीबों, असहायों के हित में करें। अपराधियों एवं असामाजिक तत्वों में पुलिस का डर हो एवं आम नागरिक पुलिस को देख कर खुद को सुरक्षित महसूस करें।

यही नहीं डीजीपी ने तो बैठक में अधिकारियों को प्रोफेशनल योग्यता बढ़ाने के भी निर्देश दे डाले। डीजीपी ने कहा है कि जनता के हित में काम करना होगा।

बैठक में क्या तय हुआ ?

  1. ईनामी अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करें।
  2. वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु दबिश बढ़ाएं और उन पर ईनाम घोषित करें।
  3. 25 हजार से अधिक ईनाम राशि वाले अभियुक्तों पर ईनाम घोषित करने के बाद उनकी फोटो सहित जानकारी को समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया पर प्रचारित-प्रसारित किया जाए। साथ ही बार्डर जनपदों/प्रदेशों के पुलिस थानों के साथ भी उनकी जानकारी साझा की जाए।
  4. दोनों परिक्षेत्र प्रभारी प्रदेश के प्रत्येक थाने में एक महिला उपनिरीक्षक की नियुक्ति सुनिश्चित करें।
  5. सोशल मीडिया पर असत्य और भ्रामक खबरें पोस्ट करने वालों पर कार्यवाही करें।
  6. ऑपरेशन मुक्ति के तहत विभिन्न कारणों से स्कूलों से ड्राप हो रहे बच्चों को पुनः शिक्षा की ओर लाने में लगातार कार्य करें। जनपदीय एएचटीयू (एन्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) को सक्रिय रखें। इस हेतु सहयोगार्थ लीलाधर मेमोरियल कल्याण समिति के साथ भी एम0ओ0यू0 किया गया है।

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